Thursday, November 12, 2009

रास्त्रपति लाई आग्रह


रास्त्रको अभिभाबक 'रास्त्रपति' ले प्रधानसेनापति थामौती गरेकू बिसयालाई लिएर आकिकृत माओबदिले आन्दोलनलाई निरंतरता दिएराहेको छ । देशमाँ आर्थिक बरसा ०६६ / ०६७ को बजेट पारित भएको छेन । रास्त्र आहिले जीबन मृत्युको दोसद्मा छात्पतैराहेको छ । जनता ले दिएको सरकारको मुख्या एजेंडा संबिधान निर्माण कार्य बिस्तारै ओझेल परेको देखिंछा । यस्तो आबस्तामा के रास्त्राले 'सर्प पानी मरने लाठी पानी नाभंचने ' गारी सोयम आपैले घुमौरो पारामा बिगत्मा जे भयो, आबा का दिना त्यस्तो हुने छैनभन्दै प्रतिबध्ता जहर गारी समस्यालाई उचित निकास दिए सच्चा रास्त्र को पिता, रास्त्रकोँ आभिभाबक को भूमिका निवाह हुने थियो ।


लेखक : थानेश्वोर पाठक (ग्लोबल चार्टर्ड , बुटवल )


टूटा हुवा सपना


Hello Friends ।
जीना चाहते हैं मगर ज़िन्दगी रास नहीं आती!
मरना चाहते हैं मगर मौत पास नहीं आती!
बहुत उदास हैं हम इस ज़िन्दगी से!
उनकी यादें भी तो तड़पाने से बाज़ नहीं आती!
एक दिन हमारे आंसूं हमसे पूछ बैठे!
हमे रोज़ - रोज़ क्यों बुलाते हो!
हमने कहा हम याद तो उन्हें करते हैं तुम क्यों चले आते हो!
तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है!
खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है!
फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ दर्दे दिलवालों!
यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है!